मर्ज़ी तुम्हारी

तेरे कहने से जब मैं संवर भी गया
तेरे कहने से मैं बिगड़ जाऊंगा

जैसे चाहे मुझे , वैसे करना फ़ना
बोल दे फिर कभी न नज़र आऊंगा  

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