Posts

Showing posts from November, 2021

मर्ज़ी तुम्हारी

तेरे कहने से जब मैं संवर भी गया तेरे कहने से मैं बिगड़ जाऊंगा जैसे चाहे मुझे , वैसे करना फ़ना बोल दे फिर कभी न नज़र आऊंगा  

सफर का अंत

 सफर में था मैं जब पाया तुम्हें पकड़ हाथ संग में ले आया तुम्हें थी मंज़िल भी एक जहाँ जाना था तुम नज़रें झुका कर कहीं चल दिए